First Postal stamp in india भारत का पहला डाक टिकट

First Postal stamp in india भारत का पहला डाक टिकट

डाक टिकटों ने पुरी दुनिया को अपने एक अदभुता से परिचित करवाने में कामयाब रहा है इन टिकटों ने जीवन में नयीं तरंग और उमंग से सरोबार किया है जिस का ही परिणाम है की आज टिकटों संग्रह करना लोगो का दुनिया सबसे बड़ा शौक है 'डाक टिकटों का व्यवस्थित संग्रह ने आज सामान्य जनजीवन में भी उतनी ही लोकप्रियता प्राप्त कर ली की इसे 'शौक़ों का राजा' और 'राजाओं का शौक़' कहे लगा और हम से सामान्य भाषा में इसे 'फ़िलेटली' अर्थात मानव के लोकप्रिय शौक़ों में से एक कहा जाता है।

डाक टिकटों का इतिहास

जब हम डाक टिकटों के इतिहास के पन्नों को देखते है तो आप देखते है तो पेशे से अध्यापक सर रोलैण्ड हिल (सन 1795-1878) को पहले डाक टिकटों का जनक कहा जाता है। सर रोलैण्ड हिल ने सन 1837 में डाक व्यवस्था में सुधार और डाक टिकटों द्वारा डाक शुल्क की वसूली के बारे में दो शोधपत्र (पोस्ट आफिस रिफ़ार्मनामक पत्र) प्रकाशित किए। इन शोध पत्रों में उन्होंने यह सुझाव दिया कि प्रत्येक आधे औंस के वजन के पत्र पर एक पेनी की समान डाक शुल्क दर के रूप में कुछ वसूला जाये , चाहे वह पत्र देश के किसी भी हिस्से के क्यों नहीं भेजा जाये | विश्व का पहला डाक टिकट 1 मई 1840 को ग्रेट ब्रिटेन में जारी किया गया था, जिसके ऊपर तत्कालीन ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया का फोटो छपा था। यह डाक टिकट काले रंग में एक छोटे से आयाताकार काग़ज पर छपा था और उसकी कीमत एक पेनी रखी गई थी। पेनी ब्रिटेन तब की मुद्रा थी यह डाक टिकट 'पेनी ब्लैक' के नाम से विख्यात हुआ। एक पेनी मूल्य के इस टिकट के सीधे किनारे के साथ अलग करने के लिए जो छोटे-छोटे छेद बनाए गये थे|

भारत में पहला डाक टिकट 

भारत में पहला डाक टिकट सन 1852 के मुख्य आयुक्त सर बर्टलेफ्र्रोरे द्वारा सिर्फ़ सिंध राज्य में मुंबई-कराची मार्ग पर डाक टिकट जरी हुआ और यह टिकट 'सिंध डाक' नामक डाक टिकट से प्रसिद्ध हुआ । आधे आने मूल्य के इस टिकट को भूरे काग़ज़ पर लाख की लाल सील चिपका कर जारी किया गया था। यह टिकट बहुत सफल नहीं रहा तो बाद में इस टिकट को बंद कर दिया गया और बाद में 1 अक्टूम्बर 1854 में नया टिकट निकला गया, जिस पर तत्कालीन ब्रिटेन की  महारानी विक्टोरिया के फोटो छपे थे। यह डाक टिकटों को लिथोग्राफी पद्धति से छपाई  की गयी ।  भारत में सन 1854 से 1931 तक डाक टिकटों पर रानी विक्टोरिया, जॉर्ज पंचम, राजा जार्ज छठे राजा एडवर्ड अष्टम एडवर्ड सप्तम, के चित्र वाले डाक टिकट ही जारी होते रहे।


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First postal stamps in independent india आजाद भारत का पहला डाक टिकट


डाक टिकटों की दुनिया भी अजीब रही इस को जितना समझा है, आदमी उतना उलझा है क्योंकि हर टिकट कुछ कहता है मगर उसको समझ ने वाले शायद कम हों रहे है तो आज मै आप को टिकट की उस अजीब दुनिया में लेकर जा रहा हु जो टिकट कभी बोलता भी था और कोई सुनाता भी था मगर सोशल मिडिया ने केवल आज हमें संवेदन हिन् ही नहीं बनाया बल्कि टिकटों की दुनिया भी वीरान कर गया | 



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क्या है डाक टिकट What is postal stamps 


       डाक टिकट वो कागज है जो डाक विभाग का प्रमाण पत्र है जिसका अर्थ है इस का भुगतान किया जा चूका है और विभाग उस को एक नोट की तरह मानता है तो मुख्यतय आयताकार होता है, इस का उपयोग डाक भेजने के लिये लिफाफे पर चिपकाया जाता है | नीचे दिया गया टिकट आजाद भारत का पहला डाक टिकट था |


आजाद भारत का पहला डाक टिकट
आजाद भारत का पहला डाक टिकट  First postal stamps in independent india 



         जरा सोचों की वो पल कितना गर्व योग्य रहा होगा जिस दिन भारत ने अपना डाक टिकट जारी किया होगा और वो पल विभाग ने एक नये आजाद भारत की परिकल्पना साकार किया था भारत का पहला डाक टिकट 21 नंवर 1947 को जारी हुआ, इसका उपयोग केवल देश के अंदर डाक भेजने के लिए किया गया। इस पर भारतीय ध्वज का चित्र और जय हिन्द लिखा हुआ था। आजाद भारत का पहला डाक टिकट साढे तीन आना राशि का था! जी सही पढ़ा आपने, साढ़े तीन 'आना' (तब की प्रचलित मुद्रा) यानि चौदह पैसा |


        15 अगस्त 1947 को नेहरू जी ने आजादी के बाद, लाल किले से अपने पहले भाषण का समापन, 'जय हिन्द' से किया। डाकघरों को सुचना भेजी गई कि नए डाक टिकट आने तक, डाक टिकट चाहे अंग्रेज राजा जॉर्ज की ही मुखाकृति की उपयोग में आए लेकिन उस पर मुहर 'जय हिन्द' की लगाई जाए। 31 दिसम्बर 1947 तक यही मुहर चलती रही। आजाद भारत की पहली डाक टिकट पर भी जय हिन्द लिखा हुआ था और ।



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     प्राप्त सूचना के अनुसार देश मे भेजे जाने वाली डाक के लिए पहले डाक टिकट पर अशोक के राष्ट्रीय चिन्ह का चित्र मुद्रित किया गया। इसकी कीमत डेढ़ आना थी। इसी तरह विदेश में भेजे जाने वाले पत्रो के लिए पहले डाक टिकट पर डीसी चार विमान का चित्र बना हुआ था, उसकी राशि बारह आना यानि 48 पैसे की थी।


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